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लॉक डाउन में गांव में अटक गई गोरी मेम, बना रही राबड़ी ओर रायता.

मंडावा (झुंझुनूं). सात समंदर पार से मंडावा के गांव घूमने आई इटली की एक महिला लॉकडाउन के कारण यहीं अटक गई। अब वह गांव को संवार रही है। जगह-जगह कलाकृतियां बना रही है। चूल्हे पर रोटी बनाना और शेखावाटी के कुछ शब्द भी सीख गई है।

इटली की महिला अमिता डॉलीसांद्रो ने बताया कि वह फरवरी में दिल्ली फोटोग्राफी क्लब में आई थी। वहां से 19 मार्च को जीतास गांव आई। फिर लॉकडाउन हो जाने के कारण वह वापस दिल्ली नहीं जा सकी। वह एक साल के वीजा पर आई है। वह यहां रिटायर्ड सूबेदार हरिसिंह शेखावत के घर के एक कमरे में रह रही है।

गांव में उसे किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही। खुद ही नाश्ता व भोजन बना लेती है। यहां तक कि बाजरे की राबड़ी व रोटी, चटनी व रायता बनाना भी सीख चुकी है। उसने बताया कि शेखावाटी के गांवों के व्यंजन बहुत ही लजीज हैं। कई बार तो गैस की बजाय चूल्हे पर भी रोटी बना लेती है। उसने बताया कि यहां तो हरिसिंह व उसकी पत्नी राजकुमारी ही माता-पिता का फर्ज निभा रहे हैं।

कर रही है पेंटिंग .

अब वह गांव में जगह-जगह पेंटिंग बना रही है। एक कार पर कलर करके डिजाइन बना दी है। उसने बताया कि यहां उसे कोई परेशानी नहीं है। पूरा गांव बहुत प्यारा है। लेकिन इटली में उनकी आठ साल की बेटी है। उसकी याद हर पल सताती है।

गांव को बनाना है आर्ट विलेज जीतास गांव के सेवानिवृत सुबेदार हरिसिंह का बेटा वीरेन्द्र सिंह शेखावत दिल्ली में फोटोग्राफी क्लब चलाता है। वीरेन्द्र सिंह ने 2010 में क्लब की स्थापना की थी। इटली की अमिता डॉलीसन्द्रो सहित देश विदेश के अनेक कलाकार इस क्लब से जुड़े हैं। क्लब के सदस्य जीतास गांव को आर्ट विलेज बनाना चाहते हैं। इसी सिलसिले में वह करीब 50 दिन पहले दिल्ली से गांव आई थी। अब जाना नहीं हो रहा। उसका कहना है दिल्ली तक अनुमति लेकर जा सकती हूं, लेकिन दिल्ली से इटली नहीं जा सकती। ऐसे में गांव में रुकना ही श्रेष्ठ समझा।