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राजस्थान रोडवेज पर कोरोना की मार, तनख्वाह देने के भी पड़े लाले

प्रतिदिन करोड़ों का नुक़सान ।

अलवर. लॉक डाउन में रोडवेज बसों के चक्के जाम हैं। बसों का संचालन बंद होने से राजस्थान रोडवेज को रोजाना करोड़ों रुपए का घाटा हो रहा है। अलवर जिले की बात करें तो यहां अब तक तीनों आगारों को करीब 5.50 से 6 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।

कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए 22 मार्च को जनता कफ्र्यू और 23 मार्च से 21 दिन का लॉक डाउन कर दिया गया। जिसके कारण पिछले करीब 18 दिनों से रोडवेज बसों का संचालन पूरी तरह से बंद है। अलवर जिले के मत्स्य नगर, अलवर और तिजारा आगार में करीब 284 बसें हैं। इन बसों के संचालन से तीनों आगारों को करीब 30 से 35 लाख रुपए की आय होती है। इस हिसाब से यदि गणना करें तो अलवर जिले के तीनों आगारों को पिछले 18 दिन में करीब 5.50 से 6 करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है।

तनख्वाह देने के भी लाले पड़े ।

घाटे से जूझ रहे राजस्थान रोडवेज की लॉक डाउन में कोढ में खाज की स्थिति हो गई है। लॉक डाउन में बसों का संचालन नहीं होने से रोडवेज का खजाना में करोड़ों रुपया नहीं आ पाया है। इस कारण अभी तक रोडवेज कर्मचारियों को तनख्वाह भी नहीं मिल पाई है।

प्रदेश के आगारों की स्तिथि ।

अलवर आगार में प्रतिदिन 130 बसें चलती हैं, यहाँ रोज 13 से 15 लाख रूपए का घाटा हो रहा है ।

मत्स्य नगर आगार में प्रतिदिन 99 बसें चलती हैं, यहाँ रोज 11 से 12 लाख रूपए का घाटा हो रहा है ।

तिजारा आगार में प्रतिदिन 55 बसें चलती हैं, यहाँ रोज 6 से 8 लाख लाख रूपए का घाटा हो रहा है ।