Home > आपका शहर > राजस्थान के एक डिएम ने किया कौरोणा को सील, भीलवाड़ा जिला बना देश के लिए रोल मॉडल

राजस्थान के एक डिएम ने किया कौरोणा को सील, भीलवाड़ा जिला बना देश के लिए रोल मॉडल

भीलवाड़ा डी एम और डॉ अनुज शर्मा को कर रहा है देश सलाम।

जयपुर : प्रदेश का भीलवाड़ा जिला कोरोना से लड़ाई में देश के लिए रोल मॉडल साबित हुआ है, प्रदेश का सबसे पहला संक्रमण का मामला इसी जिले में पाया गया था। पिछले 3 दिनों में भीलवाड़ा में कोराना का एक भी नया मामला नहीं मिला है।

सम्पूर्ण कर्फ्यू।

महा कर्फ्यू का असर।

जैसे ही भीलवाड़ा में 3 मार्च को पहला मामला सामने आया वैसे ही जिले के डी एम राजेन्द् भट्ट सहित पूरा प्रशाशन अलर्ट हो गया। डॉक्टर्स की पूरी टीम को तेयार किया गया। सरकारी अस्पतालों डिस्पेंसरियों और प्राइवेट अस्पतालों को तुरंत इस खतरे को भांपते हुए ताय्यार किया गया। साथ ही पूरे जिले में तुरंत कर्फ्यू लगा दिया गया आमजन की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई।

स्क्रीनिंग का प्रभाव

भीलवाड़ा जिले में 20 मार्च तक covid-19 के मामले 27 हो गए थे, जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी अनुज शर्मा ने तत्काल पूरे जिले के स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश जारी किए और आमजन की पूरे जिले में स्क्रीनिंग की कारवाई शुरू की गई। जिस से इस जिले में नए मामलों पर रोक लगाने में कामयाबी पाई।

स्क्रीनिंग करते हुए।

सतर्क पुलिस प्रशासन ।

जैसे ही जिले में covid-19 के मामले बढ़े, पूरा पुलिस महकमा अलर्ट हो गया , जिले में कर्फ्यू लगते ही पुलिस प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया, कर्फ्यू का बहुत कड़ाई से पालन करवाया गया। जिले के डी एम राजेन्द्र भट्ट के अनुसार सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टियां निरस्त करके उन्हें ड्यूटी पर वापस बुलाया , साथ जिला पुलिस अधीक्षक हरेंद्र सिंह के साथ मिलकर ट्रिपल लेयर नाकाबंदी की व्यवस्था करी। समस्त थाना प्रभारियों को सर्कुलर जारी करते हुए हर 4 थाना क्षेत्रों में 1 पुलिस उपाधीक्षक को थाना प्रभारियों के साथ नियुक किया गया।, जिले में सभी संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी की गई।

6 अप्रैल को 9 लोगों को किया डिस्चार्ज।

जिले के समस्त प्रशाशन और डॉक्टर्स की मुस्तैदी का नतीजा ये निकला की भीलवाड़ा में में एक भी नया मामला सामने नहीं आया, 27 में से 13 लोगो को पहले ही ठीक होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया और 6 अप्रैल को 9 और लोगों को अस्पताल से ठीक होने के बाद छुट्टी दे दी गई।

डिस्चार्ज होने के बाद मुहर लगने तक मरीजों ने सोशल डिस्टेंस का पालन किया।