Home > आपका शहर > गैस बंद, चूल्हे पर बनने लगी रोटियां गेहूं की जगह खाने लगे बाजरा!

गैस बंद, चूल्हे पर बनने लगी रोटियां गेहूं की जगह खाने लगे बाजरा!

झुंझुनूं. लोकडाउन में शहरों ही नहीं बल्कि गांवों में भी बदलाव हुआ है। जो लोग रसोई गैस पर खाना बनाते थे, उन्होंने अब पारम्परिक चूल्हे पर खाना बनाना शुरू कर दिया है। अधिकतर गांवों में ऐसा होने लगा है। एक तो इससे गैस के रुपयों की बचत हो रही है, दूसरा ग्रामीणों का तर्क है चूल्हे की रोटी ज्यादा स्वाद वाली होती है। वहीं कोरोना के बाद अब अधिकांश लोगों ने गेहूं की बजाय बाजरे की रोटी खानी शुरू कर दी है। चिड़ावा के निकट बुडानिया गांव की महिला तारावती ने बताया कि गेहूं तो अब खाबा लाग्यां हां, पहल्यां तो सब बाजरो खाता। तब कोई बीमार कोनी होतो। अब कोरोना कै कारण छोटा बड़ा सगळा बाजरा की रोटी मांगबा लाग गा…।

दूसरी महिला इंद्रा देवी ने बताया कि क्षेत्र में अब गेहूं की बजाय बाजरे की रोटी ज्यादा खा रहे हैं। सब्जियां लाने की बजाय दूध व दही के साथ ज्यादा खाना खा रहे हैं। महिला ने बताया बाजरा ज्यादा ताकत देता है। अब टमाटर व मिर्ची की सब्जियों की बजाय सूखी हुई काचरी, सूखी हुई ग्वार फली, गेहूं की फसल में उगने वाले खरपतवार बथुआ, सूखे पालक के पत्तों की देसी सब्जी ज्यादा बना रहे हैं। यह देसी सब्जी(साग) परिवार के हर सदस्य को खूब भा रही है। यह सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ ही शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती है।

इसके अलावा घर पर पशु हैं तो छाछ व दही का रायता भी हर दिन बन रहा है। रात की ब्याळू (भोजन) पहले से जल्दी होने लगी है। क्योंकि पहले परिवार के सदस्य बाहर आते-जाते रहते थे। अब अधिकतर घर ही रहते हैं तो रात का भोजन(ब्याळू) जल्दी करने लगे हैं। घर का कामकाज भी जल्द निपट जाता है। इसके अलावा रामायण और महाभारत ने तो वही पुराना माहौल बना दिया है। पूरा परिवार एक साथ रामायण और महाभारत देखता है। बच्चे भी कार्टून चैनल की बजाय रामायण की मांग करने लगे हैं।

खाली समय में बो रही सब्जियां महिलाएं खाली समय में घर में बैठने की बजाय अपने घर की खाली जगह या मकान के बगल में सब्जियां उगाने लगी है। महिला निर्मला व आशा ने बताया कि घर पर सब्जी उगाने के कई फायदे हैं। पहला समय का सदुपयोग हो रहा है। खाली जगह काम आ रही है। सब्जी उगने पर रुपयों की बचत होगी। सब्जी ताजा मिलेगी और बिना खाद व बिना कीटनाशक वाली जैविक होगी।